पुलिस स्मृति दिवस आज । भारत माना रहा है 63 वां पुलिस स्मृति दिवस। सीएम योगी आदित्यनाथ ने दी 'पुलिस स्मृति दिवस' के अवसर पर विनम्र श्रद्धांजलि

पुलिस स्मृति दिवस आज । भारत माना रहा है 63 वां पुलिस स्मृति दिवस। सीएम योगी आदित्यनाथ ने दी 'पुलिस स्मृति दिवस' के अवसर पर विनम्र श्रद्धांजलि


देश में हर सा‌ल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस (Police Commemoration Day) मनाया जाता है. इस साल यानी भारत 63वां ' पुलिस स्मृति दिवस' मना रहा है. इस दिन को पुलिस-अर्धसैनिक बलों से जुड़े तमाम लोग पुलिस शहीदी दिवस (Police Martyrs' Day) या फिर पुलिस परेड डे (Police Parade Day) के नाम से भी जानते हैं. 

पुलिस स्मृति दिवस आज । भारत माना रहा है 63 वां पुलिस स्मृति दिवस। सीएम योगी आदित्यनाथ ने दी 'पुलिस स्मृति दिवस' के अवसर पर विनम्र श्रद्धांजलि


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अक्टूबर, 2018 को दिल्ली में भारत के पहले राष्ट्रीय पुलिस संग्रहालय का उद्घाटन किया था. संग्रहालय का प्रबंधन केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) द्वारा किया जाता है. 



यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने ' पुलिस स्मृति दिवस ' के मौके पर बलिदान देने वाले पुलिस कर्मियों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की ट्वीट करते हुए लिखा,


"अपने कर्तव्य पालन के मार्ग में सर्वोच्च बलिदान देने वाले समस्त निष्ठावान एवं प्रतिबद्ध पुलिस कार्मिकों को आज 'पुलिस स्मृति दिवस' के अवसर पर विनम्र श्रद्धांजलि।


जय हिंद!"


Congress की ओर से सचिन पायलट ने विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की ट्वीट करते हुए लिखा, 


"भारतीय पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर सन् 1959 में चीन से लगने वाली भारतीय सीमा की सुरक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले पुलिस के समस्त जांबाज जवानों को मैं भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।"



क्यों मनाया जाता है पुलिस स्मृति दिवस?


ड्यूटी के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि देने के लिए हर साल 21 अक्टूबर को पूरे भारत में यह दिवस मनाया जाता है.


पुलिस स्मृति दिवस 1959 में उस दिन की याद दिलाता है, जब लद्दाख के हॉट स्प्रिंग क्षेत्र में चीनी सैनिकों द्वारा बीस भारतीय सैनिकों पर हमला किया गया था, जिसमें दस भारतीय पुलिसकर्मियों की जान चली गई थी और सात सैनिक कैद कर लिए गए थे. उस दिन से ही, शहीदों के सम्मान में 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है.


क्यों और कैसे हुआ ये हमला?


भारत के तिब्बत में 2,500 मील लंबी चीन से लगी सीमा है. 21 अक्टूबर 1959 में इस सीमा की सुरक्षा भारत के पुलिसकर्मियों कर रहे थे. चीन के घात लगाकर हमला करने से एक दिन पहले यानी 20 अक्टूबर 1959 को भारत ने तीसरी बटालियन की एक कंपनी को उत्तर पूर्वी लद्दाख में हॉट स्प्रिंग्स के इलाके में तैनात किया था. इस कंपनी को तीन टुकड़ियों में बांटकर सीमा के सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी. रोज की तरह इस कपंनी के जवान लाइन ऑफ कंट्रोल में गश्त करने के लिए निकले. 


20 अक्टूबर को दोपहर तक तीनों टुकड़ियों में से दो ही टुकड़ियों के जवान दोपरहर तक लौट आए. लेकिन तीसरी टुकड़ी के जवान उस दिन नहीं लौटे. उस टुकड़ी में दो पुलिस कांस्टेबल और एक पोर्टर था.


21 अक्टूबर की सुबह वापस नहीं लौटे तीसरी टुकड़ी के जवानों के लिए तलाशी अभियान चलाने की योजना बनाई गई. जिसका नतृत्व तत्कालीन डीसीआईओ करम सिंह कर रहे थे. इस टुकड़ी में लगभग 20 जवान थे. करम सिंह घोड़े पर सवार हुए और बाकी जवान पैदल मार्च कर रहे थे. पैदल चलने सैनिकों को 3 अलग-अलग टुकड़ियों में बांट दिया गया . इसी दौरान चीन के सैनिकों ने घात लगाकर एक पहाड़ के पीछे से फायरिंग शुरू कर दी.


 भारतीय सैनिक जो अपने साथियों को खोजने निकले थे, वो हमले का शिकार हो गए. उनके पास जरूरी हथियार भी नहीं थे. इस हमले में 10 जवान शहीद हो गए थे और ज्यादातर जवान घायल हो गए थे, इनमे 7 सैनिकों की हालत गंभीर थी.


चीनी के सैनिकों ने गंभीर रूप से घायल जवान को बंदी बना लिया और अपने साथ ले गए. बाकी अन्य जवान वहां से किसी तरह से निकलने में सफल हुए. 


ये घटना बेहद दुखद और चिंता वाली थी,इस घटना के बाद 13 नवंबर 1959 को शहीद हुए 10 पुलिसकर्मियों के शव को चीनी सैनिकों ने लौटा दिया था. 


भारतीय सेना ने उन 10 जवानों का अंतिम संस्कार हॉट स्प्रिंग्स में पूरे पुलिस सम्मान के साथ किया गया. इन्ही शहीदों के सम्मान में हर साल भारत में 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है. 


पुलिस स्मृति दिवस के दिन देश के सुरक्षा बल, चाहे वो राज्य पुलिस हो, केंद्रीय सुरक्षा बल हो या फिर अर्धसैनिक बल हो, सभी एक साथ मिलकर इस दिन को मनाते हैं.


इस घटना के बाद से भारत तिब्बत सीमा की सुरक्षा का जिम्मा एक विशेष सैन्य बल भारत तिब्बत सीमा सुरक्षा बल आईटीबीपी इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस को सौंपा गया, जो एक अर्ध सैनिक बल है. लेकिन सीआरपीएफ की सुरक्षा की जिम्मेदारी उस दौरान भी जारी रही।


1965 में भारत और पाकिस्तान युद्ध के बाद सीमा सुरक्षा बल के गठन के बाद उसे सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी से मुक्त कर देश के आंतरिक सुरक्षा के लिए पुलिस की सहायता करने की जिम्मेदारी दी गई.


'पुलिस स्मृति दिवस' की शुरुआत कब हुई और कैसे?


पुलिस स्मृति दिवस की शुरुआत साल 1960 को हुए सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों के वार्षिक सम्मेलन में इस घटना में हुए शहीद पुलिसकर्मियों को सम्मानित करने का फैसला भारत सरकार द्वारा लिया गया और हर साल 21 अक्टूबर को देश के लिए जान गवाने वाले इन सभी पुलिसकर्मियों के सम्मान में स्मृति दिवस मनाने का फैसला लिया गया. 


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